बहुत अधिक आराम ही तो आज नित्य नई-नई बीमारियों व दर्द का कारण बन रहा है : मुनिश्री विमलसागर जी

खिमलासा-मुनिश्री विमलसागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि अपने अच्छे-बुरे भावों और विचारों से ही जीवन शांत-अशांत तथा सुख-दुख का कारण बनता है। परिणामों का खेल बड़ा विचित्र है क्योंकि स्वर्ग-नरक से लेकर मोक्ष तक की स्थिति में भी परिणामों का प्रतिफल ही एकमात्र कारण है। जहां शुभ परिणाम जीवन को इस नश्वर संसार से मुक्त करा देते हैं, वहीं अशुभ परिणाम जीवन काे पतित कर देते हैं। परन्तु जिन भव्य आत्माओं ने परिणामों की विचित्रता के रहस्य को समझा वे ही सत्य से साक्षात्कार करने में सफल हो जाते हैं। उन्हाेंने कहा कि परिणामों की जन्म दाता अपनी भावना है।
विचारों से हम इस शरीर को भी शुद्ध-अशुद्ध, शुभ-अशुभ, नैतिक-अनैतिक का प्रतीक बना सकते हैं। जैसी भावना वैसा ही परिणाम सामने आएगा। धर्म में ही यह ताकत है कि वह शुभ-अशुभ भावों को जन्म देता है और अशुभ का नाशक होता है। भावोें के उतार चढ़ाव का क्रम हर व्यक्ति के जीवन में प्रत्येक क्षण चलता रहता है परन्तु धर्म आचरण ही अपने परिणामों को काले करने से बचाता है। जिनके जीवन में खोटे परिणाम चलते हैं, वे खुद तो तबाह होंगे ही दूसरों को भी तबाह करेंगे, और जिनके सद्आचरण, करूणा, दया, वात्सल्य, परोपकार के परिणाम होते है वे खुद मुक्ति को पाते हैं तथा दूसरों के जीवन में भी खुशबू फैलाते हैं। उन्हाेंने कहा कि आज देश और समाज में मानवीय भावनाओं का विकास न होने से ही चारों तरफ अशांति बढ़ रही है। जब भौतिक साधनों से इंसान निरंतर आलसी और प्रमादी होता जा रहा है तब जीवन का उत्थान कैसे होगा। बहुत अधिक आराम ही तो आज नित्य नई-नई बीमारियों व दर्द का कारण बन रहा है। जब शरीर से श्रम होगा नहीं, फिर वर निरोगी कैसे रहेगा। जब मंदिर जाने की भी फुर्सत नहीं फिर प्रभु दर्शन कैसे होंगे। जब सत्संग सुनने में मन नहीं लगता फिर सद्आचरण जीवन में कैसे विकसित होंगे। याद रहे, जिन्होंने भी पुरूषार्थ किया, उन्होंने निज के गुण निज में प्रकट किए।
     संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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