आचार्य निर्भय सागर महाराज के गृहस्थ जीवन के पिताश्री ने ली जैनेश्वरी दीक्षा

एक पुत्र ने आचार्य बनकर अपने पिता को दीक्षा दी, दृश्य देखकर श्रद्धालु हुए हर्षित
दमोह-वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के गृहस्थ जीवन के पिता सवाई सिंघई हुकुमचंद धबौली वालों ने क्षुल्लक दीक्षा ली। दीक्षा के बाद क्षुल्लक105 हर्षदत्त सागर जी महाराज  नामकरण किया गया। क्षुल्लक 105 हर्षदत्त सागर जी महाराज मकरोनिया अंकुर कॉलोनी सागर में निवास करते थे उनके पुत्र सिंघई शरद कुमार, अजय कुमार, पवन कुमार यहां पर अपने पिताश्री को लेकर आए उनकी स्थिति और दादा हुकुम चंद जी की भावना को देखते हुए आचार्य श्री ने दीक्षा देने का निर्णय किया। उन्होंने पहले कई बार दीक्षा का निवेदन किया था। परिवारजन से स्वीकृति मिलने पर दीक्षा संपन्न हुई। ज्ञात हो आज से लगभग 1 वर्ष पूर्व 10 जनवरी को उन्हें ब्रेन हेमरेज के कारण लकवा लग गया था। तब भी दीक्षा का प्रसंग सागर में आया था लेकिन निमित्त तो दमोह नगर का था वहीं उनकी क्षुल्लक दीक्षा संपन्न हुई। दीक्षा के समय पिच्छी प्रदान करने का सौभाग्य उन्हीं के गृहस्थ जीवन के पुत्र शरद कुमार, अजय कुमार, पवन कुमार बेटी सुधा एवं सविता दीदी के साथ जबलपुर नाका दमोह के डॉ. आरके जैन, डॉ. जेके जैन, संजय जैन, मनोज जैन आदि को प्राप्त हुआ। कमंडल प्रदान करने का सौभाग्य नव दीक्षितश्री हर्षदत्त सागर महाराज के गृहस्थ जीवन की पत्नी सुहाग रानी पुत्र वधु अनीता जैन, मणी जैन एवं दमोह नाका की महिला मंडल, बालिका मंडल को सौभाग्य प्राप्त हुआ। जिनवाणी प्रदान करने का सौभाग्य नीता पथरिया एवं जैन समाज जबलपुर नाका दमोह को प्राप्त हुआ।
  एक परिचय क्षुल्लक श्री का
 दीक्षार्थी श्री हुकुमचंद ग्राम धबोली तहसील बंडा जिला सागर के मूल निवासी थे। उनके 6 पुत्र एवं दो पुत्रियां हैं। हुकुम चंद 40 वर्ष तक धबौली जैन समाज के अध्यक्ष रहे। 20 वर्ष तक सरपंच रहे। आपके पिता श्री ने धबौली एवं नैनागिरि में मंदिर बनवाए। दो बार पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के साथ गजरथ चलवाए और जिससे सवाई सिंघई की उपाधि प्राप्त हुई।
आश्चर्य की बात यह रही कि पिता ने ही आपने तृतीय पुत्र अभय कुमार जो वर्तमान में आचार्य निर्भय सागर जी हैं उन्हीं के करकमलों से दीक्षा ग्रहण की। आज यह एक अनोखा दृश्य था जब एक पुत्र आचार्य बनकर अपने पिता को दीक्षा दे रहा था। जिसे देखकर श्रद्धालु अभिभूत होकर हर्षित हो रहे थे।
    संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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