गणिनी आर्यिका विशुद्धमती माताजी की जीवनी पर प्रकाश डाला
मूंगाणा -आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के सभागार में मंगलवार को आचार्य श्री 108 विभव सागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा मनुष्य अपने जीवन में क्या कुछ नहीं कर सकता, यदि अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए जी जान से जूट जाए। जब मनुष्य का पुरूषार्थ जग जाता है वही उसका मुहूर्त है, वही उसके भाग्य को जगा देता है।
आचार्य ने गणिनी आर्यिका विशुद्ध मती माता की जीवनी को बताते हुए कहा कि उन्होंने किस तरह विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने पढ़ कर ज्ञानार्जन किया। त्रिलोक परणिती जैसे महान शास्त्र पर काम किया और महान आर्यिका के रूप में प्रसिद्ध है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
