शिवपुरी | यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज द्वारा आहूत भारत बंद ने रविवार को शिवपुरी जिले को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया। एक ओर केंद्र सरकार का आम बजट संसद में पेश हो रहा था, तो दूसरी ओर सड़कों, बाजारों और चौराहों पर विरोध की आग भड़क उठी। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि भाजपा द्वारा आयोजित बजट भाषण के लाइव टेलीकास्ट कार्यक्रमों को बीच में ही बंद करना पड़ा और नेताओं को मंच छोड़कर लौटना पड़ा।
माधव चौक बना टकराव का केंद्र
शिवपुरी के हृदय स्थल माधव चौक चौराहे पर यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज का टेंट और भाजपा द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण का लाइव टेलीकास्ट टेंट आमने-सामने लगाया गया था। जैसे ही संसद में बजट भाषण शुरू हुआ, वैसे ही विरोध कर रहे सवर्ण समाज के लोग भाजपा के टेंट में घुस गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
हालात बिगड़ते देख पुलिस और आयोजकों ने आनन-फानन में लाइव टेलीकास्ट बंद कर दिया। विरोधकारियों ने भाजपा जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव को मौके पर ही ज्ञापन सौंपा। माहौल तनावपूर्ण होने के कारण भाजपा के सभी नेता बिना बजट भाषण सुने ही वहां से लौट गए।
करैरा में भी दोहराया गया वही दृश्य
करैरा में पुलिस सहायता केंद्र के पास भाजपा द्वारा बजट भाषण का लाइव टेलीकास्ट किया जा रहा था। यहां भी यूजीसी कानून का विरोध कर रहे सवर्ण समाज के लोग टेंट में घुस गए और कार्यक्रम का विरोध किया। नारेबाजी और हंगामे के चलते यहां भी लाइव टेलीकास्ट बंद करना पड़ा। भाजपा नेताओं को कार्यक्रम बीच में छोड़कर वापस जाना पड़ा।
बाजार बंद कराने पर झड़पें, बढ़ा तनाव
भारत बंद के दौरान जिले के कई कस्बों में दुकानदारों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। कई जगहों पर जबरन दुकानें बंद कराने के आरोप लगे, तो कहीं दुकानदारों ने विरोध का सामना किया।
करैरा: दुकानदार से मारपीट, लैपटॉप तोड़ा
करैरा में एक ऑनलाइन दुकान संचालक सुनील जाटव ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि यूजीसी कानून का विरोध कर रहे लोगों ने उस पर दुकान बंद करने का दबाव बनाया। जब वह दुकान बंद कर रहा था, उसी दौरान कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट कर दी। मारपीट में उसका लैपटॉप टूट गया और कंधे में चोट आई। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने चार अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट का आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।
पीड़ित का यह भी आरोप है कि इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच भी धक्का-मुक्की हुई।
नरवर: लाठियां चलीं, पथराव
नरवर के धुवाई बाजार में हालात और ज्यादा बिगड़ गए। यहां कुशवाह समाज के कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानें खुली रखीं। जब विरोध कर रहे लोगों ने दुकानें बंद करने को कहा और दुकानदारों ने मना कर दिया, तो दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।
देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। दोनों पक्षों में जमकर लाठियां चलीं और पथराव हुआ। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बाजार क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।
भौंती में शांतिपूर्ण बंद
भौंती कस्बे में स्थिति इसके उलट रही। यहां व्यापारी वर्ग के सहयोग से बाजार पूरी तरह बंद रहा। विरोध शांतिपूर्ण तरीके से हुआ और किसी भी प्रकार की झड़प या विवाद की सूचना नहीं मिली।
कोलारस: सर्व समाज का समर्थन, विशाल रैली
कोलारस में यूजीसी कानून के विरोध को सर्व समाज का व्यापक समर्थन मिला। नगर पूरी तरह बंद रहा। इस अवसर पर एक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जो रामलीला मैदान से शुरू होकर सदर बाजार, एप्रोच रोड होते हुए एबी रोड जगतपुर तक पहुंची।
रैली में विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारी वर्ग, युवाओं और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह आंदोलन जनहित से जुड़ा है और आगे भी लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाई जाएगी।
रन्नौद में बंद बेअसर, जनजीवन सामान्य
जहां जिले के कई हिस्सों में यूजीसी कानून के विरोध में बंद का व्यापक असर देखने को मिला, वहीं रन्नौद में इसका कोई खास प्रभाव नजर नहीं आया। कस्बे के बाजार सामान्य दिनों की तरह खुले रहे और दुकानों पर रोजमर्रा की चहल-पहल बनी रही। सड़कों पर यातायात भी सामान्य रहा तथा कहीं भी विरोध प्रदर्शन या धरना-प्रदर्शन दिखाई नहीं दिया।
स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों ने बंद से दूरी बनाए रखी, जिससे जनजीवन पूरी तरह सामान्य बना रहा। प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी गई, लेकिन किसी तरह की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। रन्नौद में बंद के बेअसर रहने से यह साफ है कि क्षेत्र में विरोध को लेकर खास समर्थन नजर नहीं आया।
पोहरी में बंद बेअसर, जनजीवन रहा सामान्य
यूजीसी कानून के विरोध को लेकर पोहरी में इसका कोई खास प्रभाव नजर नहीं आया। कस्बे के प्रमुख बाजार सामान्य दिनों की तरह खुले रहे और रोजमर्रा की गतिविधियां निर्बाध रूप से चलती रहीं। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही सामान्य रही तथा दुकानों और प्रतिष्ठानों पर ग्राहकों की चहल-पहल बनी रही।
बंद के आह्वान के बावजूद पोहरी में कहीं भी बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन या धरना-प्रदर्शन नहीं हुआ। शिक्षण संस्थान, बैंक और अन्य कार्यालय भी अपने तय समय पर खुले रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंद को लेकर न तो कोई पूर्व सूचना प्रभावी ढंग से पहुंची और न ही संगठित रूप से कोई आंदोलन दिखाई दिया।