पोहरी। शासन-प्रशासन द्वारा पशुपालन और गौसंरक्षण को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों की पोल बैराड़ के पशु चिकित्सालय में उस समय खुल गई, जब एक गंभीर रूप से बीमार बछड़ा इलाज के इंतजार में घंटों तड़पता रहा, लेकिन दोपहर तीन बजे तक अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला।
जानकारी के अनुसार गौसेवक बीमार बछड़े को उपचार के लिए पशु चिकित्सालय लेकर पहुंचे थे, जहां अस्पताल परिसर में सन्नाटा पसरा मिला। मौके पर डॉक्टर के नहीं होने से उपचार शुरू नहीं हो सका और बछड़े की हालत बिगड़ती रही।
गौसेवकों का आरोप है कि जब वहां मौजूद कर्मचारी प्रेमी शाक्य से डॉक्टर के बारे में पूछा गया तो उसने कथित रूप से असंवेदनशील जवाब देते हुए कहा कि “बछड़ा मरे तो मर जाए, डॉक्टर खाना खाने नहीं जाएंगे क्या?” इस कथन से गौसेवकों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पशु चिकित्सालय में अक्सर डॉक्टर के समय पर नहीं आने से पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और बीमार पशुओं को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों से मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई तथा अस्पताल की व्यवस्था सुधारने की मांग की है।
बताया जा रहा है कि घटना के बाद क्षेत्र में रोष का माहौल है और गौसेवकों ने शासन-प्रशासन से तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग उठाई है।