ईओडब्ल्यू का बड़ा एक्शन: एसडीएम और पटवारी को पोहरी से हटाने कलेक्टर को लिखा पत्र


नाम दुरुस्ती के नाम पर 10 हजार की कथित रिश्वत मांगने का मामला, ईओडब्ल्यू ने कलेक्टर को लिखा पत्र; जांच प्रभावित होने की जताई आशंका

पोहरी। पोहरी तहसील में नाम दुरुस्ती के नाम पर 10 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांगने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ग्वालियर ने तत्कालीन पोहरी एसडीएम जे.पी. गुप्ता और पटवारी अशोक वर्मा के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत एफआईआर दर्ज करने के बाद अब दोनों के स्थानांतरण की सिफारिश भी कर दी है। ईओडब्ल्यू ने कलेक्टर शिवपुरी को पत्र भेजकर कहा है कि दोनों अधिकारियों को पोहरी से हटाया जाए, ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।

मामला जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में नाम दुरुस्त कराने के एवज में 10 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांगने से जुड़ा है। शिकायतकर्ता गोविंद शिवहरे ने आरोप लगाया था कि नाम दुरुस्ती के लिए आवेदन देने पर पटवारी अशोक वर्मा ने तत्कालीन एसडीएम जे.पी. गुप्ता के नाम पर रिश्वत की मांग की। शिकायत मिलने के बाद ईओडब्ल्यू ने गोपनीय सत्यापन कराया और वॉयस रिकॉर्डिंग सहित अन्य साक्ष्य जुटाए। सत्यापन के बाद अपराध क्रमांक 80/2026 दर्ज कर दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत मामला कायम किया गया।

इसी प्रकरण में पुलिस अधीक्षक, आर्थिक अपराध शाखा ग्वालियर ने 3 जुलाई 2026 को कलेक्टर शिवपुरी को पत्र लिखकर दोनों आरोपियों के स्थानांतरण का अनुरोध किया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि आरोपी यदि पोहरी में पदस्थ रहे तो वे विवेचना को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उनका तत्काल स्थानांतरण आवश्यक है।

गौरतलब है कि पोहरी तहसील पहले भी भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सुर्खियों में रही है। पूर्व में तहसील कार्यालय के एक बाबू को लोकायुक्त ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था, जबकि अन्य राजस्व अधिकारियों पर भी विभिन्न मामलों में जांच चल रही है। ऐसे में अब तत्कालीन एसडीएम और पटवारी पर दर्ज एफआईआर तथा उनके स्थानांतरण की सिफारिश ने राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ईओडब्ल्यू का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं अब सभी की निगाहें कलेक्टर के उस निर्णय पर टिकी हैं, जो स्थानांतरण संबंधी इस सिफारिश पर लिया जाएगा।

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