थूबोनजी दर्शन कर ठहर जाने को मन करता है: प्रसाद सागर जी

थूबोनजी-धरती पर देवता बसते है, नहीं हो विश्वास तो थूबोनजी आकर देख लो।  अद्भुत प्रतिमाएं इतनी विशाल की नजर उठाओ तो नजर ठहर जाती हैं। बस निहारते  रहो और प्रभु भक्ति में खो जाओ। हमें अपने आपको प्रभु के चरणों में समर्पित  करने की कला को सीखना होगा, तो जो दर्शनोदय थूबोनजी जैसे तीर्थो पर ही  संभव है। यह बात थूबोनजी में विराजमान मुनि श्री प्रसाद सागर जी महाराज ने  कही।

मुनिश्री निकंलक सागर जी महाराज ने कहा कि भगवान के अभिषेक के लिए  निर्दोष वस्त्रों का होना चाहिए। वे वस्त्र किसी से स्पर्शित नहीं होना  चाहिए। मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने एक बार तीर्थ पर अभिषेक  शान्तिधारा करने वाले भक्तों के बीच कहा था कि जिन वस्त्रों से भगवान की  पूजा अर्चना की जाती है अभिषेक शान्तिधारा की गई हो वह वस्त्र भी आपकी  भक्ति से चमत्कारी हो जाता है। ये वस्त्र तमाम तरह की बाहरी बाधाओं को दूर  करने का सामर्थ्य रखते हैं और जिन घरों में ये वस्त्र प्रतिदिन शुद्धि के  लिए डले तो अन्य कोई भी आपको प्रभावित नहीं कर सकता। हमें इन वस्त्रों को  शुद्धि के साथ ही रखना चाहिए। वस्त्रों की शुद्धि आपके भावों को पवित्र  बनाए रखने में सहयोग बनती है।
      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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