अगर चुनौती स्वीकार करने की भावना है तो रोज नया वर्ष: आचार्यश्री


दमोह-सन् 2020 की समापन बेला पर आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में शांतिनाथ विधान हुआ। जिसमें जैन समाज जबलपुर नाका दमोह के समस्त श्रावक श्राविकाओं ने भाग लिया। मुनिश्री शिवदत्त सागरजी मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी एवं छुल्लक  श्री धरीचंद्रदत्त सागर जी महाराज ने विधान के मंत्रों का वाचन किया। 
इसी कड़ी मेआचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने विधान के महत्व को समझाते हुए कहा कि भगवान की भक्ति से बड़ी-बड़ी आपत्ति-विपत्ति, रोग शोक दूर हो जाते हैं। भक्ति करने से साल भर में किए हुए अपराध क्षमा हो जाते हैं और पाप धुल जाते हैं। विधान के माध्यम से भगवान की भक्ति की जाती है। विधान आत्मा के संविधान के लिए किया जाता है। भगवान की विशेष पूजा विशिष्ट द्रव्य से करने का नाम विधान है। परमात्मा की भक्ति और आत्मा का ध्यान करने परमात्मा का संविधान लागू हो जाता है। वर्तमान साल का अंत और नए साल का प्रारंभ यदि मंगलमय होता है तो बीते वर्ष का फल प्राप्त हो गया और नया वर्ष आनंदमय बीतेगा ऐसा सिद्ध होता है। गुरु के आशीर्वाद से और परमात्मा की भक्ति से प्रारंभ किए गए कार्य का अंत अच्छा होता है। इसीलिए नया वर्ष नाच-गान एवं खान-पान के साथ प्रारंभ न करके भगवान की भक्ति एवं गुरु का आशीर्वाद लेकर प्रारंभ करना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा नया वर्ष नया इतिहास रचने के लिए आता है, पुराने अधूरे कार्य को पूर्ण करने आता है, नई चुनौती, नया संकल्प, नई ऊर्जा नया उत्साह और नई चेतना लेकर आता है मौज-मस्ती और नाच गान के लिए नहीं आता है। लेकिन नए वर्ष लक्ष्य को संकल्पवान एवं परिश्रमी व्यक्ति ही पूर्ण कर पाता है। इस वर्ष हमारे सामने कोरोना से मुक्ति पाने एवं देश को आगे बढ़ाने का लक्ष्य सर्व प्रथम है। जिस व्यक्ति के अंदर सुबह उठते ही नया उत्साह, नई ऊर्जा, नया संकल्प, नई चुनौती स्वीकार करने की भावना है उसके लिए प्रतिदिन नया वर्ष है। जो व्यक्ति नए वर्ष पर आधी रात को सुरा सुंदरी फूहड़ नाच गान के चक्कर में पड़कर नए वर्ष की शुरुआत करते हैं वे लोग नया इतिहास न रचकर काला इतिहास रच रहे हैं।
श्रद्धा, ज्ञान और वैराग्य चरित्र उत्पन्न करते हैं
आचार्य श्री ने कहा श्रद्धा, ज्ञान और वैराग्य मिलकर चरित्र उत्पन्न करते हैं। मोह करंट की तरह होता है जो आत्मा को चिपका लेता है अथवा झटका मारकर दूर फैंक देता है। राग रुपी मोह चिपकाने का कार्य करता है और द्वेष रुपी मोह झटका मारकर हटाने का काम करता है। लेकिन जिसके जीवन में वैराग्य रूपी प्लास्टिक का कवर हो तो मोह रुपी करंट उसका कुछ भी कभी नहीं बिगाड़ सकेगा।
        संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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