भोपाल। जूनागढ़ (गुजरात)। युवा प्रतिभाओं के बढ़ते कदमों के बीच जूनागढ़ निवासी हरीश भाई मेपा की 16 वर्षीय बेटी एवं नवोदित लेखिका आराधना ने साहित्यिक और भाषाई क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल करते हुए गुजराती भाषा में ‘धम्मलिपि परिचय’ नामक पुस्तक लिखी है। कम उम्र में तैयार की गई यह पुस्तक धम्मलिपि सीखने के इच्छुक पाठकों के लिए एक मार्गदर्शिका के रूप में सामने आई है।
धम्मलिपि को विभिन्न भाषा परिवारों में विस्तार मिलता देख इसे ज्ञान और सांस्कृतिक संवाद का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आराधना ने धम्मलिपि का अध्ययन ‘साँची दानं’ और धम्मलिपि डिक्शनरी जैसे स्रोतों की सहायता से किया और उसी अनुभव के आधार पर गुजराती भाषा में इस विषय पर पुस्तक तैयार की। उनका उद्देश्य धम्मलिपि के अध्ययन को सरल और सुलभ बनाते हुए अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ना बताया गया है।
पुस्तक में धम्मलिपि की मूल अवधारणा, अक्षरों की संरचना, लेखन पद्धति और प्रारंभिक अभ्यास से संबंधित सामग्री को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जिससे नए पाठकों एवं विद्यार्थियों को इसे समझने में सुविधा हो सके। कम कीमत पर उपलब्ध कराकर इसे व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने का प्रयास किया गया है।
‘धम्मलिपि परिचय’ पुस्तक का मूल्य मात्र 70 रुपये रखा गया है। साहित्यप्रेमियों और समाज के जागरूक नागरिकों से अपील की गई है कि वे पुस्तक खरीदकर नवोदित लेखिका आराधना का मनोबल बढ़ाएँ और ज्ञान-विस्तार की इस पहल में सहयोग दें। कम उम्र में किया गया यह प्रयास न केवल लेखन प्रतिभा को दर्शाता है, बल्कि नई पीढ़ी में भाषाई और सांस्कृतिक अध्ययन के प्रति बढ़ती रुचि का भी परिचायक है।