लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्रीय बजट 2026 को निराशाजनक और गरीबों की समझ से परे बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट किसानों, नौजवानों, व्यापारियों, महिलाओं और आम जनता को निराश करता है। शिक्षा क्षेत्र की उपेक्षा की गई है, जबकि बिना शिक्षा के विकसित भारत की कल्पना संभव नहीं। यह बजट केवल सपने दिखाने वाला है।
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा से आम जनता को कोई उम्मीद नहीं रही, इसलिए बजट से भी अपेक्षा नहीं थी। भाजपा बजट के माध्यम से केवल अपने लोगों को लाभ पहुंचाती है और लगभग 5 फीसदी लोगों के हितों को साधती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने लोगों के मुनाफे और तरक्की पर ही ध्यान देती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने अपने वादे पूरे नहीं किए—किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई, महंगाई बढ़ती जा रही है और नौजवानों के लिए रोजगार नहीं है। सामाजिक न्याय के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है। सरकार को बताना चाहिए कि 95 फीसदी आबादी की प्रति व्यक्ति आय क्या है।
अखिलेश यादव ने देश की पर्यावरणीय स्थिति को भयावह बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंचों पर यह सवाल उठ रहा है कि देश की हवा तक सुरक्षित नहीं है, जिससे लोगों की जानें जा रही हैं और निवेश भी प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि अच्छा बजट वही होता है जिससे गरीब की तरक्की हो और चेहरे पर मुस्कान आए, लेकिन इस बजट में महंगाई रोकने और शिक्षा सुधारने के कोई ठोस इंतजाम नहीं हैं। बुनियादी ढांचा कमजोर है, ऐसे में एआई से क्या होगा? गंदे पानी से लोगों की मौतें हो रही हैं—क्या यही स्मार्ट सिटी और विकसित भारत है?
अखिलेश यादव ने बुलेट ट्रेन परियोजना का हवाला देते हुए कहा कि जो 1 लाख करोड़ की बननी थी, उसकी लागत 2 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। बजट लगातार बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सपने दिखाकर गरीब, किसान और मध्यम वर्ग के वोट लेती है, लेकिन बजट 5 फीसदी लोगों के लिए बनाती है। किसानों की मंडियों, दुग्ध क्षेत्र, आलू खरीद व भंडारण के लिए कोई प्रावधान नहीं है। अस्पतालों में पर्याप्त इलाज नहीं मिल रहा, यूपी के एम्स में बुनियादी सुविधाओं, तकनीकी स्टाफ और डॉक्टरों की कमी है। आम गरीब के लिए बिजली महंगी है, जबकि बिजली उत्पादक कंपनियां हजारों करोड़ का मुनाफा कमा रही हैं।
नदियों की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि गंगा सहित नदियां गंदगी से भरी हैं। गंगा की सफाई के लिए सहायक नदियों की सफाई जरूरी है, लेकिन भाजपा सरकार के पास न नीति है, न नीयत। बजट में उत्तर प्रदेश को एक भी नया एक्सप्रेस-वे नहीं मिला और सरकार की योजनाएं अदृश्य हैं।
उन्होंने कहा कि बजट का परिणाम बाजार में गिरावट के रूप में सामने आया है। महंगाई बढ़ने के बावजूद टैक्स में राहत न देना ‘टैक्स-शोषण’ है। अमीरों को तरह-तरह की छूट दी गई, जबकि बेरोजगारी से जूझ रहे लोगों की थाली खाली है। मध्यम वर्ग ठगा महसूस कर रहा है और शोषित-वंचित और नीचे खिसकता दिख रहा है। सामाजिक सुरक्षा केवल शाब्दिक औपचारिकता बनकर रह गई है। किसान, मजदूर, श्रमिक, छोटे कारोबारी और दुकानदार राहत को दूरबीन से भी नहीं ढूंढ पा रहे हैं।