हितेश जैन, पोहरी। शिवपुरी जिला मुख्यालय से लगभग 35 किमी दूर और पोहरी से मात्र 3 किमी की दूरी पर स्थित प्राकृतिक एवं धार्मिक आस्था का केंद्र केदारेश्वर धाम इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हरे-भरे जंगलों, पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी अद्भुत अनुभव प्रदान करता है।
पहाड़ियों के मध्य स्थित केदारेश्वर महादेव मंदिर की विशेषता यह है कि यहां एक प्राकृतिक छोटी गुफा के भीतर भगवान शिव का प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। गुफा के ऊपरी हिस्से से पहाड़ों से निकलने वाली शीतल जलधारा वर्षभर शिवलिंग पर गिरती रहती है, जिसे भक्तजन भगवान शिव का प्राकृतिक जलाभिषेक मानते हैं। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल धार्मिक मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मेले को देखते हुए पुलिस एवं प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं की तैयारियां पहले ही पूरी कर ली जाती हैं।
500 वर्ष पुराना बताया जाता है इतिहास
केदारेश्वर धाम का इतिहास करीब 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। जनश्रुति के अनुसार सिद्ध संत श्री मंगलदास महाराज को स्वप्न में भगवान शिव ने दर्शन देकर बताया कि वे पहाड़ों के बीच लिंग स्वरूप में विराजमान हैं। इसके बाद संत ने तत्कालीन पोहरी शासक राजा नवल खांडेराव को इसकी जानकारी दी। राजा द्वारा कराई गई खुदाई में शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसके बाद यहां मंदिर का निर्माण कराया गया।
यह प्राचीन मंदिर सरकुला नदी के किनारे स्थित है और इसके दूसरी ओर स्थित क्षेत्र आज भी ‘बूढ़ी पोहरी’ के नाम से जाना जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक आस्था के कारण यह स्थल जिले ही नहीं, पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है।
गुप्त गंगा और गौमुख का अमृत तुल्य जल
मंदिर परिसर में शिवलिंग के सामने एक कुंड स्थित है जिसे ‘गुप्त गंगा’ कहा जाता है। श्रद्धालु इसी जल से अभिषेक करते हैं। मंदिर की तीसरी मंजिल पर बने गौमुख से करीब पांच शताब्दियों से निरंतर जलधारा बह रही है। पहाड़ियों से होकर आने वाले इस जल में औषधीय जड़ी-बूटियों का मिश्रण होने के कारण स्थानीय लोग इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानते हैं।
रहस्यमयी ध्वनियां बढ़ाती हैं आस्था
मंदिर के पुजारी पंडित रामनिवास भार्गव के अनुसार कई श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में घंटियों के बजने, घोड़ों के पैरों की आवाज और आरती की गूंज सुनने की बात कही है। हालांकि इन ध्वनियों का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है, लेकिन इससे श्रद्धालुओं की आस्था और गहरी हो जाती है। वर्षभर धर्मप्रेमी यहां दर्शन के लिए आते रहते हैं।
मनोकामना पूर्ति का केंद्र
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से प्रार्थना करने पर यहां की गई मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। यही कारण है कि इस धाम के प्रति लोगों में गहरी श्रद्धा और भक्ति देखने को मिलती है।
जड़ी-बूटियों का प्राकृतिक भंडार
चारों ओर फैले जंगलों में अनेक दुर्लभ जड़ी-बूटियों का भंडार मौजूद है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां मिलने वाली जड़ी-बूटियां चर्म रोग, सफेद दाग सहित अन्य बीमारियों के उपचार में उपयोगी मानी जाती हैं।
आस्था, प्रकृति, इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम समेटे केदारेश्वर धाम आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां लगने वाला मेला एक बार फिर इस धार्मिक स्थल को भक्तिमय माहौल से सराबोर करने को तैयार है।